सबसे बड़ा मूर्ख - Akbar Birbal Ki Kahani

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आजकल लोग अपना समय व्यर्थ की बातों में बर्बाद करते हैं। इस कहानी से शिक्षा लेनी चाहिए की जिन कार्यों को करने से समय नष्ट होता है उन्हें नहीं करना चाहिए। अपना समय सही कार्यों में लगाएं और समय का सदुपयोग करें। नहीं तो आप भी सबसे बड़े मूर्ख बन जाओगे।

सबसे बड़ा मूर्ख - Akbar Birbal Ki Kahani
सबसे बड़ा मूर्ख - Akbar Birbal Ki Kahani

एकबार अकबर और बीरबल दरबार में बैठे थे। जैसा कि आप जानते हो बीरबल अकबर के नौ रत्नों में से एक था और अकबर का मंत्री भी था। अकबर को अचानक से बीरबल की परीक्षा लेने की सूझी।

अकबर ने बीरबल से कहा - बीरबल, जाओ, मुझे इस राज्य के चार सबसे बड़े मूर्ख ढूंढकर दिखाओ।

बीरबल ने कहा - जी हुजूर कहकर खोज शुरू कर दी।

एक महीने बाद बीरबल दो लोगों के साथ वापस आए। अकबर ने  गुस्से से कहा - मैंने चार मूर्ख लाने को कहा था और तुम सिर्फ दो लाए।

बीरबल ने कहा - हुजूर लाया हूं। पेश करने का मौका दिया जाए।

अकबर ने कहा - ठीक है।

बीरबल -  हुजूर यह पहला मूर्ख है। इसे मैंने बैलगाड़ी पर बैठकर भी बैग सिर पर ढोते देखा। पूछने पर जवाब मिला कि कहीं बैल पर वजन ज्यादा न हो जाए इसलिए बैग सिर पर ढ़ो रहा हूं। इस लिहाज से यह बड़ा मूर्ख है।

दूसरे आदमी की तरफ इशारा करके बीरबल बोले - मैंने देखा कि इसके घर की छत पर घास उपजी थी। अपनी भैंस को छत पर ले जाकर घास खिला रहा था। मैंने वजह पूछी तो बोला कि घास छत पर जम जाती है तो भैंस को ऊपर ले जाकर उसे खिला देता हूं। हुजूर, यह आदमी घास काटकर नीचे लाकर भैंस को खिलाने के बजाय बेचारी भैंस को ऊपर ले जाकर घास खिलाता है तो इससे इसकी अक्ल का साफ अंदाजा लगाया जा सकता है। जहांपनाह, अपने राज्य में इतने काम हैं। मुझे बहुत सारे काम करने हैं, फिर भी मैंने मूर्खों को ढूंढने में महीना बर्बाद कर दिया तो मैं भी मूर्ख ही हुआ ना, इसलिए तीसरा मूर्ख मैं हूं।

बादशाह सलामत, पूरे राज्य की जिम्मेदारी आप पर है। दिमाग वाले ही सारा काम करेंगे, मूर्ख कुछ नहीं कर पाएंगे। फिर भी आप मूर्खों की तलाश करा रहे हैं तो जहापनाह चौथे मूर्ख हुए आप।

अकबर बीरबल की चतुराई और हाजिरजवाबी पर मुस्कुराए बिना न रह सके।

आपको यह Akbar Birbal Ki Kahani कैसी लगी, कमेंट करके जरूर बताएं। इस कहानी को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें। धन्यवाद 

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