बीरबल की खिचड़ी - Akbar Aur Birbal Ki Kahani Number 12

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दोस्तों Akbar Aur Birbal Ki Kahaniyon में सबसे अधिक चर्चित कहानी "बीरबल की खिचड़ी" है। यह कहानी इतनी चर्चित है कि लोग इसको छोटी-छोटी बातों में उपयोग करते हैं। इस लेख में आपको "बीरबल की खिचड़ी" कहानी पढ़ने को मिलेगी। अगर आपको यह कहानी अच्छी लगी, तो अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें।


बीरबल की खिचड़ी - Akbar Aur Birbal Ki Kahani Number 12
बीरबल की खिचड़ी - Akbar Aur Birbal Ki Kahani Number 12
दोस्तों आप सब ने हिंदी में एक कहावत सुनी होगी "बीरबल की खिचड़ी पकाना ", क्या आप जानते हैं कि इस कहावत के पीछे एक दिलचस्प कहानी है। ये कहानी अकबर और उनके नवरत्न बीरबल से जुडी है। इसी कहानी के आधार पर प्रसिद्द कहावत "बीरबल की खिचड़ी पकाना" का उपयोग शुरू होता आया है। कहानी इस प्रकार है:

एक दिन बादशाह अकबर ने घोषणा की, कि जो आदमी सर्दी के इस मौसम में नदी के ठण्डे पानी में रात-भर खड़ा रहेगा, उसे शाही खजाने से पुरस्कृत किया जायेगा।

इस घोषणा को सुनकर एक गरीब धोबी ने सारी रात नदी में खड़े-खड़े बिता दी और अगले दिन बादशाह के दरबार में आकर इनाम मांगने लगा।

बादशाह ने उस धोबी से सवाल किया, क्या तुम बता सकते हो किस शक्ति के सहारे तुम रात नदी में खड़े रहे ?

धोबी ने अदब के साथ जवाब दिया, आलमपनाह, मैं कल सारी रात महल की छत पर जलते हुए चिराग को देखते रहा।

उसी की शक्ति से मैं सारी रात नदी में खड़ा रह सका।

बादशाह ने उसका जवाब सुनकर कहा, इसका मतलब तो यह हुआ की महल की रोशनी की आंच की गरमी के कारण तुम सारी रात पानी में खड़े रह सके, इसलिए तुम इनाम के सच्चे हकदार नहीं हो सकते।

धोबी उदास हो गया और बीरबल के पास जाकर निराशा भरे स्वर में बोला, दरबार में बादशाह ने इनाम देने से इंकार कर दिया है। धोबी ने इसका कारण भी बीरबल को बता दिया।

बीरबल ने गरीब धोबी को सांत्वना देकर घर भेज दिया। बादशाह ने अगले दिन बीरबल को दरबार में न पाकर एक खादिम को उन्हें बुलाने के लिए भेजा।

खादिम ने उन्हें आकर सूचना दी, बीरबल ने कहा है कि जब उनकी खिचड़ी पूरी पक जाएगी तभी वह दरबार में आ सकेंगे।

बादशाह को यह सुनकर बड़ा अचरज हुआ। वह अपने दरबारियों के साथ बीरबल के घर पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि दो लम्बे बांसों के ऊपर एक हंडिया में चावल रखकर उसे लटकाया गया है और नीचे जमीन पर आग जल रही है।

बादशाह ने तत्काल पूछा, बीरबल, यह क्या तमाशा है ?

क्या इतनी दूरी पर रखी हंडिया में खिचड़ी पक जाएगी ?

हुजूर जरूर पक जाएगी। बीरबल ने उत्तर दिया।

कैसे ? बादशाह ने कौतूहलवश पूछा ?

जहाँपनाह बिल्कुल वैसे ही जैसे महल के ऊपर जल रहे दिये की गर्मी के कारण धोबी सारी रात नदी के पानी में खड़ा रहा। बीरबल ने कहा।

बादशाह अकबर बीरबल का यह तर्कसंगत उत्तर सुनकर लज्जित हुए।

उन्होंने तुरन्त धोबी को ढूंढ लाने और पुरस्कृत करने का आदेश जारी कर दिया।

जब लोगों को ये बात पता चली तभी से  "बीरबल की खिचड़ी " एक कहावत के रूप में प्रचलित हो गयी। जिसका सीधा-सा-अर्थ यह है कि किसी आसान काम को बहुत मुश्किल बताना या फिर किसी छोटे से काम को करने में बहुत अधिक समय लगा देना|

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