बुला कर लाओ - Akbar Aur Birbal Ki Kahani Number 8

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बुला कर लाओ - Akbar Aur Birbal Ki Kahani Number 8
बुला कर लाओ - Akbar Aur Birbal Ki Kahani Number 8

एक दिन सुबह-सुबह बादशाह ने अपने एक सेवक को हुक्म दिया| ‘जाओ बुला कर लाओ’|

आगे कुछ नहीं बताया| सेवक ने भी नहीं पूछा और उसका साहस भी नहीं हुआ| लेकिन उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि वह किसे बुला

कर लाए? उसने अपने सभी मित्रों से मदद मांगी, लेकिन कोई बात नहीं बनी| अंत में वह बीरबल के पास पहुंचा| वह जाते ही बीरबल के पैरों में

गया और गिड़गिड़ाकर कहने लगा:- ‘हुजूर, मेरी मदद करो| मैं बड़े संकट में फंस गया हूं’| बीरबल ने कहा:- ‘क्या बात है बताओ’| बात यह है

हुजूर, बादशाह ने आज हुक्म दिया है कि जाओ बुला कर लाओ| अब आप ही बताइए कि मैं किसे बुलाकर लाऊं, समझ में नहीं आ रहा है|

बीरबल ने पूछा:- ‘जिस समय हुक्म दिया था, वह क्या कर रहे थे’?

नहाने की तैयारी में थे| बीरबल ने कहा, तो जाओ जल्दी से नाई को बुला कर ले आओ| बादशाह, हजामत बनवाना चाहते हैं| सेवक नाई को

बुलाकर ले आया| बादशाह बहुत खुश हुए| उन्होंने पूछा:- ‘यह सलाह तुम्हें किसने दी, तुम तो इतने चतुर नहीं हो’|

सेवक ने डरते हुए कहा:- ‘बादशाह सलामत, यह सलाह मुझे बीरबल ने दी है’| बादशाह इस बात को सुनकर बड़े खुश हुए|

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